Ranjit Singh History of Cricket | 5 Amazing info रणजीत सिंह जी जड़ेजा इतिहास

Updated: July 16th, 2021 at 08:40 am

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रणजीत सिंह जी जड़ेजा भारतीय क्रिकेट के पितामह ! समय-समय पर भारत ने बहुत ही महान क्रिकेटरों को जन्म दिया है, वर्तमान पीढ़ी में हम सभी कपिलदेव,सचिन,राहुल द्रविड़, धोनी,विराट कोहली को महानतम खिलाडियों के रूप में जानते है।

क्या आपको पता हे भारत का पहला क्रिकेटर कौन था।  जिसने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला था, जी हाँ हम बात कर रहे उस क्रिकेटर की जिसकी वजह से आज क्रिकेट हर भारतीय की आत्मा बन गया है।

जिसे भारतीय क्रिकेट का पितामहः कहलाने का गौरव प्राप्त है और साथ ही भारत के घरेलू क्रिकेट सत्र के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी का नामकरण भी उनके नाम पर किया गया है। 

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रणजीत सिंह जड़ेजा | Ranjit Singh Jadeja
महाराजा रणजीत सिंह जड़ेजा

उस महान खिलाड़ी का नाम था जाम साहेब रणजीत सिंह जी जाडेजा  (गुजरात में नवानगर रियासत के महाराजा ) वह पहले भारतीय थे जिन्होंने प्रोफेशनल टेस्ट मैच और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उन्हें अब तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजो में से एक माना जाता है।

Ranjit Singh History of Cricket

रणजीत सिंह जी का जन्म 10 सितंबर 1872 को काठियावाड़, गुजरात नवानगर राज्य के सदोदर नामक गाँव में जाडेजा राजपूत परिवार में हुआ।

यूँ तो उनका नाम रणजीत सिंह जी था, लेकिन उन्हें उनके नाम रणजी से जाना जाता था। रणजीत के जन्म के पांच साल बाद यानी 1877 में टेस्ट क्रिकेट शुरू हुआ।

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इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच को ऑस्ट्रेलिया ने जीत लिया था।  उस समय क्रिकेट में ज्यादा से ज्यादा इंग्लैंड का दबदबा था।  क्रिकेट का जन्म इंग्लैंड में हुआ और शुरुआती दौर में सिर्फ इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट खेलते थे।

भारत में क्रिकेट का कोई विस्तार नहीं हुआ था और यह उम्मीद भी नहीं की जा रही थी कि भारत में जन्मे किसी खिलाड़ी को इंग्लैंड क्रिकेट टीम में मौक़ा मिलेगा, बड़े होने पर कुमार श्री रणजीत सिंह जी को राजकोट के राजकुमार कॉलेज में शिक्षा लेने के लिये भेजा गया। वहां स्कूली शिक्षा के साथ उनका क्रिकेट से परिचय हुआ। वो कई साल कॉलेज की क्रिकेट टीम के कप्तान रहे।

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रणजीत सिंह जी जड़ेजा विदेश पढ़ाई को जाना

उनकी पढाई में योग्यता से प्रभावित होकर उन्हें आगे की पढ़ाई के लिये इंग्लैंड की कैम्ब्रिज़ यूनिवर्सिटी में पढ़ने भेजा गया। वहॉ पर रणजीत सिंह जी की रूचि क्रिकेट खेलने में बढ़ने लगी जिसकी वजह से वो शिक्षा पर ध्यान नही दे पाए।

उन्होंने पूरी तरह क्रिकेट को अपना कैरियर बनाने का निर्णय लिया। पहले वो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की ओर से खेला करते थे। इसके बाद वे ससेक्स से जुड़ गए और लॉर्डस में पहले ही मैच में 77 और 150 रन की पारियां खेली।

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काउंटी क्रिकेट में बल्ले से धमाल के बाद उन्हें इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में चुन लिया गया और 1896 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रणजीत सिंह ने पहला टेस्ट खेला। इस मैच में उन्होंने 62 और 154 नाबाद की पारी खेली।

दूसरी पारी में तेज खेलते हुए 23 चौके की मदद से 154 पर नॉट आउट थे और दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए जिन्हें अपने पहले टेस्ट मैच में पहली पारी में अर्धशतक और दूसरे पारी में शतक मारने का गौरव हासिल हुआ।

सिर्फ इतना ही नहीं रणजीत टेस्ट क्रिकेट के पहला खिलाड़ी थे, जो अपने करियर के पहले टेस्ट मैच में शतक ठोकते हुए नॉट आउट रहे बल्ले से उनके इस प्रदर्शन की न केवल इंग्लैण्ड बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भी जमकर तारीफें हुई। उन्होंने लगभग चार साल क्रिकेट खेला।

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रणजीत सिंह जी का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन

प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रणजीत सिंह का काफी अच्छा रिकॉर्ड है।  रणजीत ने 307 प्रथम श्रेणी मैच खेलते हुए करीब 56 के औसत से 24692 रन बनाए, जिसमें 72 शतक और 109 अर्धशतक शामिल हैं।

रणजीत ने ससेक्स के लिए चार साल तक कप्तानी भी की वे भारत के पहले क्रिकेट खिलाड़ी थे, जिन्होंने इंग्लैंड की तरफ से अपना क्रिकेट करियर शुरू किया।

उस वक्त भारत में अंग्रेजों का शासन था और रणजीत का इंग्लैंड टीम में चयन हुआ था, रणजीत के इंग्लैंड टीम में चयन को लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

रणजीत सिंह का जब 1896 में इंग्लैंड टीम में चयन हुआ तब लार्ड हारिस इस चयन के खिलाफ थे। उनका कहना था कि रणजीत का जन्म इंग्लैंड में नहीं बल्कि भारत में हुआ है, तो इंग्लैंड टीम में उनका चयन नहीं होनी चाहिए।

Ranjit Singh Jadeja एक श्रेठ बल्लेबाज

रणजीत सिंह जी को अब तक के विश्व के सर्वकालिक महान बल्लेबाज में से एक माना जाता है। विस्डन पत्रिका ने भी उन्हें 5 सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ियो में जगह दी थी।

नेविल्ले कार्डस ने उन्हें “midsummer night’s dream of cricket” कहा है। उन्होंने यह भी कहा है कि जब रणजीत सिंह खेलने के लिये आए तो जैसे पूर्व दिशा से किसी अनजाने प्रकाश ने इंग्लैंड के आकाश को चमत्कृत कर दिया। अंग्रेजी क्रिकेट में वो एक नई शैली लेकर आए।

उन्होंने बिलकुल अपरंपरागत बैटिंग तकनीक और तेज रिएक्शन से एक बिलकुल नई बल्लेबाजी शैली विकसित कर के क्रिकेट में क्रांति ला दी। पहले बल्लेबाज फ्रंट फुट पर ही खेलते थे, उन्होंने बैकफुट पर रहकर सब तरह के शॉट लगाने का कारनामा सबसे पहली बार कर के दिखाया।

रणजीत सिंह अब तक क्रिकेट खेलने वाले सबसे मौलिक stylist में से एक के रूप में जाना जाता है। उनके समय के क्रिकेटर CB Fry ने उनकी विशिष्टता के लिये उनके जबरदस्त संतुलन और तेजी जो एक राजपूत की खासियत है को श्रेय दिया है।

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक ही दिन में दो शतक मारने का उनका 118 साल पुराना रिकॉर्ड अब तक कोई नही तोड़ पाया है। शुरुआत के नस्लवाद के बावजूद रणजीत सिंह जी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के दर्शको में अत्यधिक लोकप्रिय क्रिकेटर बन गए थे।

महाराजा रणजीत सिंह जी जड़ेजा का निधन

1933 में उनका जामनगर में देहांत हो गया। उनके बारे में सर नेविले कार्डस ने ही लिखा कि,”जब रणजी ने क्रिकेट को अलविदा कहा तो खेल से यश और चमत्कार हमेशा के लिए चला गया।”

क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए पटियाला के महाराजा भूपिन्दर सिंह ने उनके नाम पर 1935 Ranji Trophy की शुरूआत की। जो बाद में भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतियोगिता बन गई।

उनके भतीजे कुमार श्री दलीपसिंहजी ने भी इंग्लैण्ड की ओर से क्रिकेट खेला। उनके नाम पर दलीप ट्रॉफी की शुरूआत हुई। नवानगर के शाशक के रूप में भी उनको राज्य का विकास करने, पहली बार रेल लाइन बिछाने, सड़के बनवाने, आधुनिक सुविधाओ वाला एक बंदरगाह बनवाने और राजधानी को विकसित करवाने का श्रेय दिया जाता है।

महाराजा जाम साहेब रणजीत सिंह जी जाडेजा को हमारा शत शत नमन_/\_

FAQ’s

रणजीत सिंह जी जड़ेजा कौन थे?

रणजीत सिंह जड़ेजा गुजरात के नवानगर रियासत के महाराजा थे, वह पहले भारतीय थे जिन्होंने प्रोफेशनल टेस्ट मैच और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उन्हें अब तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजो में से एक माना जाता है।

भारतीय क्रिकेट का पिता किसे कहाँ जाता है?

नवानगर रियासत के महाराजा रणजीत सिंह जी जड़ेजा को भारतीय क्रिकेट का पिता कहाँ जाता है। उनके नाम से ही भारत की प्रसिद्ध रणजी ट्रॉपी आयोजित की जाती है।

टेस्ट क्रिकेट में एक दिन में दो शतक का रिकॉर्ड किसके नाम है?

118 साल पहले टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक ही दिन में दो शतक मारने का रिकॉर्ड महाराजा रणजीत सिंह जड़ेजा ने बनाया था, जो आज तक कायम है।

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About Vijay Singh Rathore

जय माता जी की दोस्तों ! मैं Vijay Singh Rathore, Rajput's Wiki का Author & Founder हूँ। मैं एक पूर्णकालिक ब्लॉगर और सोसिअल मिडिया influencer हूँ। जिसे इंटरनेट से जुड़ी जानकारियाँ एवं इतिहास के विषय में जानना पसंद है। मेरी आपसे विनती है की आप लोग इसी तरह हमारा सहयोग देते रहिये और हम आपके लिए नईं-नईं जानकारी उपलब्ध करवाते रहेंगे।

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